• January 11, 2020
बाल-विकास-एवं-शिक्षा शास्त्र-प्रश्न-बैंक

बाल विकास एवं शिक्षा शास्त्र प्रश्न बैंक-2

नमस्कार दोस्तों राजस्थान बोर्ड के द्वारा आयोजित होने वाले परीक्षा रीट लेवल 1 लेवल 2, RPSC ग्रेड – प्रथम व ग्रेड – द्वितीय के लिए बाल विकास एवं शिक्षा शास्त्र के महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर बैंक

हम इस वेबसाइट की मदद से आप सभी को बाल विकास और शिक्षा शास्त्र के एक पंक्तिय प्रश्न उपलब्ध करा रहे हैं जिससे आपको परीक्षा की तैयारी में मदद मिलेगी

सभी प्रश्न उत्तरों को ध्यानपूर्वक पढ़ें यह प्रश्न उत्तर बहुत ही सावधानीपूर्वक बनाए गए है फिर भी आपको इनमें कोई त्रुटि या कमी दिखाई देती है तो कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं उसे जल्द ही सही कर दिया जाएगा

बाल विकास एवं शिक्षा शास्त्र प्रश्न बैंक

1 – 10



(1) समाजीकरण की प्रक्रिया मे कितने चरण होते है।
≫ – सामाजीकरण की प्रक्रिया में तीन चरण होते है।
1. सामाज के नियमों को सीखना
2. समाज के नियमों के अनुरूप व्यवहार करना
3. सामाजिक अभिवृत्तियों का विकास



(2) शिशु के मतिष्क का बजन कितना होता है।
≫ – 350 ग्राम



(3) स्वास्‍थ मनुष्य के मतिष्क का वजन कितना होता है।
≫ – 1400 ग्राम



(4) 6 माह में बालक का बजन लगभग कितना हो जाता है।
≫ – 6 माह में बालक का बजन जन्म के समय के बजन का दो गुना हो जाता है।



(5) 1 वर्ष में बालक का बजन कितना हो जाता है।
≫ – 1 वर्ष में बालक का वजन जन्म के समय के बजन का तीन गुना हो जाता है।



(6) जन्म के समय किसकी लम्बाई अधिक होती है।
≫ – जन्म के समय लडकों की लम्बाई लडकियों कि लम्बाई कि तुलना में अधिक होती है।



(7) जन्म के समय बालक एवं बालिका की लम्बाई लगभग कितनी होती है।
≫ – बालक की लम्बाई लगभग 20 इंच तथा बालिका कि लम्बाई लगभग 19.5 इंच होती है।



(8) मानव के अस्थाई दांत ( दूध के दांत ) कितने होते है।
≫ – 20



(9) मानव के स्थाई दांत कितने होते है।
≫ – 12



(10) किशोर अवस्था में कितने दांत आते है।
≫ – 4 दांत आते है ( इन्हें अक्ल की ढाड भी कहते है। )





11 – 20



(11) व्यवहार में होने वाले स्थायी परिवर्तन, जो अभ्यास के कारण होते है। उसे कहा जाता है।
≫ – सीखना ।



(12) बच्चों में संवेगात्मक समायोजन प्रभावी होता है।
≫ – 1. व्यक्तित्व निर्माण में
2. कक्षा शिक्षण में
3. अनुशासन में



(13) बच्चो के संज्ञानात्मक विकास को सबसे अच्छे तरीके से कहॉ परिभाषित किया जा सकता है।
≫ – विद्यालय एवं कक्षा में ।



(14) माता पिता से वंशजों में स्थानान्तिरित होने वाले लक्षणों को कहा जाता है।
≫ – अनुवंशिकता ।



(15) थॉर्नडाइक के व्यक्तित्व‍ के वर्गीकरण का आधार है।
≫ – चिन्तन और कल्पना ।



(16) विकास के किस काल को ‘अत्याधिक दबाव और तनाव का काल’ कहा गया है।
≫ – किशोरावस्था ।



(17) कक्षा कक्ष में शिक्षक व विद्यार्थियों के मध्य सम्प्रेषण होना चाहिए।
≫ – उद्देश्य् केन्द्रित ।



(18) डिस्ग्राफिया मुख्यत: किस कठिनाई से जुडा है।
≫ – लिखने सम्बन्धि ।



(19) खिलौनों की आयु किस अवस्था को कहा जाता है।
≫ – पूर्व – बाल्यवस्था को ।



(20) किसी अद्दीपन के निरन्तर दिए जाने से व्यवहार में होने वाला अस्थायी परिवर्तन कहलाता है।
≫ – अभ्यस्तता ।





21 – 30



(21) नवीन ज्ञान और नवीन प्रतिक्रियाओं को प्राप्‍त करने की प्रक्रिया, सीखने की प्रक्रिया है। यह कथन है।
≫ – वुडवर्थ का।



(22) थस्‍टर्न द्वारा 1937 में प्रतिपादित क्रमबद्ध अंतर विधि का व्‍यापक प्रयोग एवं प्रचार किस मनोवैज्ञानिक ने किया।
≫ – सफीर।



(23) बालक के व्‍यक्तिगत अध्‍ययन की मनोवैज्ञानिक विधि है।
≫ – केसल स्‍टडी।



(24) कौन सा विभेदन सीखने में उच्‍च स्‍तरीय उपायों का प्राकल्‍पनाओं के उपयोग पर बल डालता है।
≫ – असात्‍य सिद्धान्‍त।



(25) अधिगम के क्रम में कौन सी क्रिया बालक पहले करेगा।
≫ – आत्‍मसाथ।



(26) व्‍यक्ति भेदों का अध्‍ययन तथा सामान्‍यीकरण का अध्‍ययन किस विधि द्वारा किया जाता है।
≫ – विभेदात्‍मक विधि।



(27) संबंधवाद, वह सिद्धान्‍त है तो समस्‍त मानसिक क्रियाओं को परिस्थितियों तथा अनुक्रियाओं के बीच मूल एवं अर्जित संयोजन का कार्य मानता है कथन है।
≫ – रेन का।



(28) अधिगम स्‍थानांतरण में सामान्‍य तथा विशिष्‍ट अंश का सिद्धान्‍त किस मनोवैज्ञानिक ने प्रस्‍तुत किया।
≫ – स्पियर मैन।



(29) वह विधि जिसमें खंड व पूर्ण विधियों का एक साथ प्रयोग किया जाता है, उसका नाम है।
≫ – मिश्रित विधि।



(30) स्‍वामित्‍व अधिगम शिक्षण विधि का प्रतिपादन किसने किया।
≫ – ब्‍लूम।





31 – 40



(31) संचारवादी संप्रदाय के प्रवर्तक थे।
≫ – विलियम वूँट।



(32) थॉर्नडाइक ने निम्‍न में से कौन सा नियम बताया है
तैयारी का नियम, व्‍यवहार का नियम, अभ्‍यास का नियम, प्रभाव का नियम

≫ – अभ्‍यास का नियम



(33) अपने सिद्धान्‍त का नाम आदर्शो व मूल्‍यों का सिद्धान्‍त किसने दिया।
≫ – डब्‍ल्‍यू सी वाग्‍ले।



(34) जब किसी व्‍यक्ति का अवलोकन निश्चित परिस्थितियों में ही किया जाता है तो वह कहलाता है।
≫ – नियंत्रित अवलोकन।



(35) वुडवर्थ ने सबसे पहले किस विधि का निर्माण किया।
≫ – प्रश्‍नावली विधि।



(36) किस मनोवैज्ञानिक अध्‍ययन विधि में उत्‍तरदाता प्रश्‍नकर्ता के सम्‍मुख नहीं बैठता है।
≫ – प्रश्‍नावली विधि।



(37) प्रयोगात्‍मक पद्धति की कमी है।
≫ – अपने दोषो को छिपाना।



(38) मनोविज्ञान में निरीक्षण पद्धतियाँ कितने प्रकार की होती है।
≫ – दो।



(39) सीखना संबंध स्‍थापित करता है। मस्तिष्‍क, मुनष्‍य का संबंध तंत्र है।
≫ – थॉर्नडाइक का कथन है।



(40) थेवरी ऑफ लर्निंग पुस्‍तक के लेखक है।
≫ – ई. आर. हिलगार्ड।





41 – 50



(41) गणित का सीखा हुआ ज्ञान भौतिक विज्ञान सीखने में सहायक होता है यह कौन अधिगम स्‍थानान्‍तरण है।
≫ – धनात्‍मक स्‍थानांतरण।



(42) शैखिक समस्‍याओं का सर्वोत्‍तम समाधान हो सकता है।
≫ – समूह परिचर्चा द्वारा।



(43) स्‍थानांतरण में सामान्‍यीकरण का सिद्धान्‍त किस शिक्षा मनोवैज्ञानिक ने प्रस्‍तुत किया है।
≫ – सी.एच.जूड. ।



(44) मस्तिष्‍क द्वारा अपनी स्‍वयं की क्रियाओं का निरीक्षण किस विधि द्वारा किया जाता है।
≫ – आत्‍म निरीक्षण विधि।



(45) निर्देशन का अर्थ है।
≫ – छात्रों को अपनी समस्‍या सुलझाने हेतु सहायता देना।



(46) यदि किसी जटिल कार्य के केवल एक पक्ष पर ध्‍यान दिया जाता है और दूसरे पक्षों की अपेक्षा की जाती है तो पठार बन जाता है कथन है।
≫ – स्‍टीफेंस का।



(47) शिक्षा के उद्देश्‍यों का वर्गीकरण किया है।
≫ – बी. एस. ब्‍लूम ने।



(48) सीखने को प्रभावित करने वाला तत्‍व नहीं है।
≫ – सौन्‍दर्यानुभूति।



(49) अनुकूलित अनुक्रिया सिद्धान्‍त किस मनोवैज्ञानिक ने दिया।
≫ – पावलॉव ने।



(50) बहुतत्‍व मानसिक योग्‍यता सिद्धान्‍त के प्रतिपादक है।
≫ – कैली एवं थस्‍टर्न।





51 – 60



(51) ज्ञानात्‍मक उद्देश्‍यों में किसकी विधि का उपयोग किया जाता है।
≫ – राबर्ट मेगर की।



(52) योग निर्धारण विधि का प्रतिपादन किसने किया।
≫ – लिकर्ट।



(53) सीखना या अधिगम आदतों, ज्ञान और अभिव्रत्तियों का अर्जन है। यह कथन है।
≫ – क्रो का।



(54) शिक्षा के उद्देश्‍यों का मुख्‍य रूप से विकसित किया है।
≫ – बी. एस. ब्‍लूम ने।



(55) सीखना प्रक्रिया का आधारभूत पक्ष हो सकता है।
≫ – निरंतरता।



(56) समूह गत्‍यात्‍मकता सिद्धांत के प्रणेता थे।
≫ – कुर्त लेविन।



(57) वह कौन सा चक्र है जिसमें सीखने के आरंभ में सीखने की गति तीव्र होती है। तथा क्रमश मंद हो जाती है।
≫ – उन्‍नतोदर वक्र।



(58) शिक्षण अधिगम प्रबंधन प्रत्‍यय के प्रवर्तक है।
≫ – आई. के डेवीज।



(59) अनुभव और प्रशिक्षण द्वारा व्‍यवहार में परिवर्तन लाना ही अधिगम या सीखना है। कथन है।
≫ – गेट्स का ।



(60) पूर्णकारवाद के जन्‍म दाता है।
≫ – वर्दीमर।





61 – 70



(61) अधिगम के लिए सदैव सहायक अवयव नहीं है।
≫ – उच्‍च चिंतन।



(62) जब शरीर के एक पक्ष के अंग का दिया गया प्रशिक्षण भविष्‍य में उपयोगी सिद्ध हो तो वह कहलाता है।
≫ – एक पक्षीय अंतरण।



(63) जिस साक्षात्‍कार के माध्‍यम से छात्र के घर तथा वातावरण के संबंध में सूचनाऍ प्राप्‍त की जाती है। वह
≫ – निदानात्‍मक साक्षात्‍कार।



(64) एक समूह की बनावट का अध्‍ययन करने में प्रयुक्‍त होती है।
≫ – समाज मिति विधि।



(65) सफल साक्षात्‍कार के लिए आवश्‍यक है।
≫ – आत्‍मीयता का स्‍थान।



(66) प्रेरकीय संप्रदाय से संबन्धित है।
≫ – मैकडुगल ।



(67) किस मनोवैज्ञानिक संप्रदाय ने बालक मनोविज्ञान बुद्धि परीक्षण आदि मनोवैज्ञानिक उपविषयों को सर्वप्रथम प्रस्‍तुत किया।
≫ – कार्यात्‍मवाद।



(68) अंतरदर्शन पद्धति मानोविज्ञान के किस संप्रदाय से संबन्धित है।
≫ – कार्यात्‍मवाद।



(69) किसे खेल प्रणाली का जन्‍म दाता माना जाता है।
≫ – फ्रोबेल।



(70) कक्षा में निरंतर चलने वाली अंत: क्रियाओं के अध्‍ययन को कहा जाता है।
≫ – समूह गत्‍यात्‍मकता।





71 – 80 बाल विकास एवं शिक्षा शास्त्र



(71) साक्षात्‍कार का संबंध है।
≫ – व्‍यक्ति से व्‍यक्ति का।



(72) दमन के स्‍थान पर पुरूस्‍कार द्वारा व्‍यवहार सुधारने की बात मनोविज्ञान के किस संप्रदाय में कही गयी है।
≫ – व्‍यवहारवादी।



(73) व्‍यवहारवाद किसके परीक्षणों पर आधारित था।
≫ – इवान पावलॉव।



(74) सीखने वालों के लिए यह आवश्‍यक की वह क्‍या स्‍मरण रखे और क्‍या भुला दे। कथन है।
≫ – क्रो एवं क्रो।



(75) शिक्षा में पूर्ण से अंश की और पद्धति किस संप्रदाय की देन है।
≫ – गेस्‍टाल्‍ट ।



(76) मनोविज्ञान में महत्‍व है।
≫ – निरीक्षण का अंतदर्शन का, बहिर्दर्शन का।



(77) अधिगम के नियमों को प्रतिपादित किया।
≫ – थार्नडाइक।



(78) खेल गीतों व उपहारों द्वारा शिक्षा दी जाती है।
≫ – किंडर गार्टन पद्धति में।



(79) मनोविश्‍लेषणात्‍मक प्रणाली के जन्‍मदाता है।
≫ – सिंगमंड फ्रायड।



(80) प्रायोजन विधि किस संप्रदाय पर आधारित है।
≫ – प्रेरकीय संप्रदाय।





81 – 90 बाल विकास एवं शिक्षा शास्त्र



(81) अधिगम की प्रक्रिया पूर्ण कब होती है।
≫ – जब व्‍यवहार में स्‍थायी परिवर्तन हो जाए।



(82) मनोविज्ञान का जनक किसे कहा जाता है।
≫ – सिंग्‍मण्‍ड फ्रायड को



(83) अंधों की लिपि के जनक किसे कहा जाता है।
≫ – लुई ब्रेल



(84) अंधों के लिए लुई ब्रेल ने कौनसी लिपि का प्रतिपादन किया।
≫ – ब्रेल लिपि



(85) नर्सरी पद्धति के जनक किसे कहा जात है।
≫ – मारिया मांन्‍टेसरी



(86) L.K.G.व U.K.G. पद्धति के जनक है।
≫ – फ्रोबेल



(87) जीनपियाजे कहा के मनोवैज्ञानिक थे।
≫ – स्विटजरलैण्‍ड के



(88) जीन पियाजे किस विचारधारा के समर्थक थे।
≫ – संज्ञानात्‍मक



(89) स्‍कीमा सिद्धांत का जनक किसे माना गया है।
≫ – जीन पियाजे



(90) जीनपियाजे ने अपना प्रयोग किस पर किया था।
≫ – दो पुत्रियों एवं पुत्र पर





91 – 95 बाल विकास एवं शिक्षा शास्त्र



(91) बाल अपराध बनने के कारण क्या क्या है।
≫ – 1. आनुवांशिंकता
2. व्याक्तिगत आवश्यकताओ की पूर्ति न होना
3. शारीरिक दोष – ऐसे बालक हीन भावना से ग्रसित होने के कारण अपराधी बन जाते है।
4. घर का वातावरण अशान्त होना।
5. कुसंगती के कारण
6. दादा दादी का अधिक लाड प्यार
7. स्तर हीन मनोरंजन
8. माता पिता का गरीब होना
9. पक्षपात पूर्ण व्यवहार
10. माता पिता का तलाक आदि



(92) बाल अपराधियों के उपचार क्या क्या है।
≫ – 1. मनोवैज्ञानिक विधि
2. समाजशास्त्रीय विधि
3. वैधानिक विधि



(93) समस्याग्रस्त बालक कौन से होते है।
≫ – वे बालक जिनके व्यवहार में ऐसी कोई असामान्य बात होती हैा जिसके कारण वे समस्याग्रस्त बालक बन जाते है। जैसे –
1. कक्षा में देर से आना
2. स्कूाल से भाग जाना
3. कक्षा में अधिक बाते करना
4. अधिक क्रियाशीलता होना
5. ग्रहकार्य करके न लाना
6. कक्षा में पढाई में ध्याान न लगाना



(94) समस्याग्रस्तं बालकों की समस्या शिक्षक द्वारा कैसे दूर की जा सकती हैा
≫ – 1. शिक्षक को चाहिए कि ऐसे बालकों को अलग-अलग बिठायें और सबसे आगे विठायें।
2. शिक्षक को स्वयं बालक की समस्या को कारणों का पता लगाना चाहिए और दूर करना चाहिए।
3. शिक्षकों को ऐसे बालकों के घर जाकर उनकी समस्या का पता लगाना चाहिए।



(95) गिलफोर्ड ने सृजनशीलता के 4 तत्व कौन से बताये है।
≫ – 1. लोचशीलता
2. मौलिकता
3. अपसारीशीलता
4. केन्द्रा विमुख








96- 100 बाल विकास एवं शिक्षा शास्त्र



(96) वैज्ञानिक गुड ने सृजनशीलता के कितने तत्व दिये।
≫ – वैज्ञानिक गुड ने सृजनशीलता के पॉच तत्व दिये जो निम्न् है।
1. मौलिकता
2. अनुकूलता
3. विचारात्मलक
4. विचारों का सहचर्य
5. लोथ शील और विविध



(97) सृजनात्मकता के प्रमुख तत्व कौन से है।
≫ – 1. मौलिकता
2. नवीनता
3. लोचशीलता
4. विस्तातरण करेन की क्षमता
5. विभिन्नाता



(98) सृजनशील बालकों की विशेषताऍ क्या क्या है।
≫ – 1. सृजनशील बालक जिज्ञासु प्रवर्ति के होते है।
2. सृजनशील बालकों में उच्य् महत्वकांक्षा वाले होते है।
3. सृजनशील बालकों के विचार व्या‍पक होते है।
4. सृजनशील बालकों मे संवेदन शीलता अधिक पाई जाती है।
5. सृजनशील बालकों मे एकाग्रता पाई जाती है।



(99) मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है यह किसने कहा।
≫ – अरस्तू ने !



(100) बालक के सामाजीकरण की पहली पाठशाला कौन सी होती है।
≫ – पहली – घर एवं परिवार
दूसरी – खेल का मैदान
तीसरी – स्कूल











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